Bike loan Co-applicant|क्या बाइक लोन में को-एप्लीकेंट की जरूरत होती है?

Kaiteyi Sharma

By Kaiteyi Sharma

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Bike loan Co-applicant

आज के समय में बाइक सिर्फ़ एक साधन नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है। कॉलेज जाने वाले छात्र हों, नौकरीपेशा लोग हों या छोटे व्यापारी – सभी के लिए बाइक स्वतंत्रता और सुविधा का प्रतीक है। लेकिन जब इस सपने को पूरा करने की बारी आती है तो सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या लोन लेने के समय Bike loan co-applicant की जरूरत होगी? यह सवाल लगभग हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो पहली बार बाइक लोन लेने जा रहा है।

Bike loan co-applicant क्या होता है?

Bike loan Co-applicant

सीधे शब्दों में कहें तो Bike loan co-applicant वह व्यक्ति होता है जो आपके साथ लोन की जिम्मेदारी साझा करता है। इसका मतलब यह है कि आप और आपका को-एप्लीकेंट दोनों मिलकर बैंक को आश्वासन देते हैं कि समय पर लोन चुकता किया जाएगा।

आमतौर पर को-एप्लीकेंट आपके परिवार से होता है, जैसे:

  • पति या पत्नी
  • माता-पिता
  • भाई या बहन

बैंक के नज़रिये से देखा जाए तो को-एप्लीकेंट का होना उनके लिए सुरक्षा की तरह होता है।

क्यों ज़रूरी हो सकता है Bike loan co-applicant?

  1. कम क्रेडिट स्कोर – यदि आपका CIBIL स्कोर बैंक की शर्तों से कम है, तो अकेले लोन लेना मुश्किल हो सकता है। को-एप्लीकेंट आपके लिए दरवाज़ा खोल देता है।
  2. आय की कमी – अगर आपकी सैलरी या आय बैंक की न्यूनतम सीमा से कम है, तो को-एप्लीकेंट की आय जुड़ जाने पर बैंक को भरोसा बढ़ता है।
  3. उच्च लोन राशि चाहिए – यदि आप महंगी बाइक लेना चाहते हैं और आपकी पात्रता उस राशि तक नहीं पहुँचती, तो को-एप्लीकेंट के जुड़ने से बड़ी लोन राशि मिल सकती है।
  4. लोन अप्रूवल जल्दी – बैंक जब देखती है कि दो लोग मिलकर जिम्मेदारी ले रहे हैं, तो अप्रूवल की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।

Bike loan co-applicant के फायदे

  • बेहतर ब्याज दरें – जब जोखिम कम होता है तो बैंक आपको कम ब्याज पर भी लोन देने को तैयार होती है।
  • EMI का बोझ हल्का – यदि EMI को बांटने की व्यवस्था हो तो आपके ऊपर दबाव कम हो सकता है।
  • क्रेडिट स्कोर में सुधार – समय पर भुगतान करने से आप दोनों का स्कोर बेहतर हो सकता है।
  • सपनों की बाइक पाना आसान – को-एप्लीकेंट के साथ आप उस बाइक को भी खरीद सकते हैं जिसे शायद अकेले लेना मुश्किल होता।

Bike loan co-applicant के नुकसान

  1. साझा जिम्मेदारी – अगर किसी कारणवश EMI छूट जाती है तो इसका असर दोनों पर पड़ता है।
  2. क्रेडिट स्कोर का जोखिम – देर से भुगतान दोनों का स्कोर गिरा देता है।
  3. रिश्तों में तनाव – पैसा और जिम्मेदारी कई बार नज़दीकी रिश्तों में भी खटास ला सकती है।
  4. कानूनी जटिलताएँ – अगर विवाद हो जाए तो कानूनी तौर पर भी को-एप्लीकेंट जिम्मेदार होता है।

किन परिस्थितियों में Bike loan co-applicant की जरूरत नहीं होती?

  • जब आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर है।
  • आपकी आय बैंक की न्यूनतम सीमा से अधिक है।
  • यदि आप बहुत कम लोन राशि के लिए आवेदन कर रहे हैं।
  • आपका बैंकिंग इतिहास साफ़-सुथरा है।

Bike loan co-applicant चुनते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. भरोसेमंद रिश्ता – ऐसा व्यक्ति चुनें जिस पर आप व्यक्तिगत और आर्थिक दोनों स्तर पर भरोसा कर सकें।
  2. आर्थिक स्थिरता – को-एप्लीकेंट की नौकरी या बिज़नेस स्थिर होना चाहिए।
  3. अच्छा क्रेडिट स्कोर – यदि उसका स्कोर अच्छा होगा तो लोन अप्रूवल आसान होगा।
  4. लंबे समय का नाता – लोन की अवधि 2-5 साल तक हो सकती है, इसलिए लंबे समय तक भरोसेमंद साथी ही चुनें।

असल जिंदगी का उदाहरण

Bike loan Co-applicant

मान लीजिए, राजेश नाम का एक युवक नई स्पोर्ट्स बाइक खरीदना चाहता है जिसकी कीमत 1.5 लाख रुपये है। उसकी मासिक आय 18,000 रुपये है, लेकिन बैंक को न्यूनतम 20,000 रुपये की आय चाहिए। राजेश के पिता सरकारी कर्मचारी हैं और उनकी सैलरी 40,000 रुपये है। ऐसे में पिता को Bike loan co-applicant बनाने से बैंक आसानी से लोन अप्रूव कर देती है और राजेश का सपना पूरा हो जाता है।

क्या Bike loan co-applicant हमेशा ज़रूरी है? यह आवश्यक नहीं है। यह पूरी तरह आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि लोन जल्दी अप्रूव हो, अच्छी ब्याज दर मिले और अधिक राशि उपलब्ध हो, तो को-एप्लीकेंट को शामिल करना एक समझदारी भरा कदम है।

निष्कर्ष

बाइक का सपना हर किसी का होता है और यह सपना आज के समय में बिल्कुल भी दूर नहीं है। अगर आपकी वित्तीय स्थिति थोड़ी कमजोर है या आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर नहीं है, तो Bike loan co-applicant आपके लिए सहारा बन सकता है। लेकिन याद रखें, यह केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए हमेशा समझदारी और भरोसे के साथ सही व्यक्ति को को-एप्लीकेंट बनाइए।

डिस्क्लेमर

यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। लोन लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत स्थिति, बैंक की शर्तों और वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।

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को-एप्लीकेंट कब आवश्यक होता है?

कम क्रेडिट स्कोर, नए रोजगार या सैलरीड न्यूनतम सीमा से कम होने पर को-एप्लीकेंट मांगा जा सकता है।

क्या को-एप्लीकेंट ब्याज दर घटाता है?

सह-आवेदक के अच्छे स्कोर व आय से ऋणदाता का जोखिम घटता है, जिससे ब्याज दरों में सुधार मिल सकता है।

कौन को-एप्लीकेंट बन सकता है?

अभिभावक, जीवन साथी, माता-पिता या वयस्क संतान; जिनके पास स्थिर आय व अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल हो।

दस्तावेज़ क्या होने चाहिए?

दोनों आवेदकों की पहचान, पते, आय प्रमाण और बैंक स्टेटमेंट; को-एप्लीकेंट के भी वही डॉक्यूमेंट चाहिए।

Kaiteyi Sharma

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